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Saturday, March 18, 2017

असाधारण होने की परेशानी

बचपन से हमें सिखाया जाता है कि हम बड़े असाधारण हैं, हम में ढेर सारी प्रतिभा है, हम दूसरों से बेहतर हैं। इस सिखावन के पीछे उद्देश्य रहता है कि हम जीवन में आगे बढ़ें और कुछ करके दिखाएँ। लेकिन कई बार परिणाम ठीक उल्टा आता है। चूंकि हमारे मन में बैठ जाता है कि हम दूसरों से बेहतर हैं, इसलिए हम जीवन भर इस कोशिश में लगे रहते हैं कि अपने आपको कैसे बेहतर सिद्ध कर सकें। हम जान-पहचान के लोगों और अजनबियों से हर वक़्त रेस में लगे रहते हैं। कभी शांति से रह नहीं पाते।
अगर हम यह मान लें कि हम भी वैसे ही हैं जैसे दूसरे हैं, न बेहतर और न खराब, तो ये बेमतलब की मानसिक रेस खत्म हो जाती है। फिर जीवन में शांति आ जाती है। अपनी खुशी के लिए अपने-आपको दूसरों से ज़्यादा सफल और बुद्धिमान दिखाने की फिराक में नहीं रहते। और आराम से सोफ़ा पर बैठकर सुड़क-सुड़क कर कॉफी पी सकते हैं।

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