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Tuesday, June 01, 2010

दोस्त

कोई हँसाता है
कोई रुलाता है
कोई उन तन्हा पलों में
मेरा मन बहलाता है

कोई मेरे हर राज़ जानता है
कोई मेरी हर बात मानता है
किसी की बातें कर देतीं फ़िदा
कोई आँखों के सामने नाचता है

पर वो ज़रा निराला है
पर उसमें कुछ ख़ास है
जो मेरी छुपी अच्छाइयों में
एक नयी जान डालता है